बिछड़ी ज़िंदगियों को घर का रास्ता दिखाता एक आश्रम

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M3M Foundation के सहयोग से भाग्यश्री महिला अनाथ आश्रम केवल महिलाओं का पुनर्वास नहीं कर रहा, बल्कि बिछड़े रिश्तों को भी फिर से जोड़ रहा है।

हिसार, हरयाणा। कई बार कोई इंसान सिर्फ घर से नहीं खोता, बल्कि अपनों की ज़िंदगी से भी खो जाता है।

घर का एक कमरा सालों तक वैसे ही रहता है। अलमारी में रखे कपड़े कोई छूता नहीं। दरवाज़े पर हर आहट सुनकर लगता है कि शायद इस बार वह लौट आई होगी। हर अनजान फोन कॉल पर दिल धड़क उठता है कि कहीं कोई ख़बर मिल जाए।

लेकिन कई परिवारों के हिस्से में सिर्फ इंतज़ार आता है।

ऐसा इंतज़ार, जो महीनों नहीं, वर्षों तक चलता है।

माया देवीफूली देवीरामरतीनिक्कीकौशल्यासुनीतारोशनीअंजू

ये सिर्फ नाम नहीं हैं।

ये उन माताओं, बेटियों, बहनों और पत्नियों की कहानियाँ हैं, जो कभी मानसिक बीमारी, पारिवारिक परिस्थितियों, घरेलू हिंसा, मानसिक आघात या अन्य विपरीत परिस्थितियों के कारण अपने घरों से बिछड़ गईं। समय के साथ उन्होंने सिर्फ अपना रास्ता ही नहीं, बल्कि अपनी पहचान भी खो दी। किसी को अपना नाम याद नहीं था, किसी को अपना गाँव, तो किसी को यह भी याद नहीं था कि उसका घर किस राज्य में है।

वे रेलवे स्टेशन के आसपास मिलीं, बस अड्डों पर मिलीं, सड़कों के किनारे भटकती हुई मिलीं, कूड़े के ढेरों के पास मिलीं। कई दिनों तक बिना भोजन के रहने से उनका शरीर कमजोर हो चुका था। कई महिलाओं के शरीर पर गंभीर घाव थे, त्वचा संक्रमण से भर चुकी थी और समय पर इलाज न मिलने के कारण उनकी हालत बेहद नाज़ुक हो गई थी।

लेकिन इन महिलाओं की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

क्योंकि कहीं न कहीं, कोई उनका इंतज़ार कर रहा था।

और इसी इंतज़ार को उम्मीद में बदलने का काम पिछले पाँच वर्षों से हिसार स्थित भाग्यश्री महिला अनाथ आश्रम, M3M Foundation के सहयोग से कर रहा है।

हिसार और उसके लगभग 200 किलोमीटर के दायरे में मानसिक रूप से अस्वस्थ, बेसहारा और लावारिस महिलाओं को सुरक्षित आश्रय देने वाला यह आश्रम आज केवल एक संस्था नहीं, बल्कि उन महिलाओं और उनके परिवारों के बीच एक पुल बन चुका है, जिनके मिलने की उम्मीद लगभग समाप्त हो चुकी थी।

आज इस आश्रम में देश के अलग-अलग राज्यों से आई करीब 80 महिलाएँ रह रही हैं, जिन्हें सुरक्षित आवास, पौष्टिक भोजन, कपड़े, दवाइयाँ, स्वच्छता सामग्री और नियमित चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि आश्रम अब तक 185 से अधिक महिलाओं को उनके परिवारों से दोबारा मिला चुका है।

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इन 185 महिलाओं के पीछे 185 परिवारों की अलग-अलग कहानियाँ हैं।

किसी बेटे ने अपनी माँ को खोजने में कई साल बिता दिए। किसी पति ने अपनी पत्नी को तलाशने के लिए गाँव-गाँव भटका। एक परिवार ने तो अपनी लापता महिला सदस्य की तलाश में अपनी ज़मीन और पशु तक बेच दिए। कई परिवार ऐसे भी थे, जिन्होंने उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। लेकिन एक दिन हिसार से आया एक फोन उनकी पूरी दुनिया बदल गया—आपकी माँ मिल गई हैं…” या आपकी पत्नी सुरक्षित हैं…”

ऐसे ही कई परिवारों के लिए भाग्यश्री महिला अनाथ आश्रम ने सिर्फ एक व्यक्ति नहीं लौटाया, बल्कि उनका बिखरा हुआ परिवार वापस लौटा दिया।

आश्रम में आने वाली हर महिला की शुरुआत लगभग एक जैसी होती है, लेकिन हर कहानी का अंत अलग होता है।

जब कोई महिला आश्रम तक पहुँचती है, तो सबसे पहले उसका इलाज शुरू किया जाता है। गंभीर रूप से बीमार महिलाओं का उपचार हिसार के सामान्य अस्पताल और अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में कराया जाता है। धीरे-धीरे पोषण, दवाइयों, नियमित देखभाल और अपनत्व के बीच उनकी सेहत सुधरने लगती है। फिर एक दिन अचानक उन्हें किसी गाँव का नाम याद आता है। कभी किसी बेटे का नाम, कभी किसी भाई का, तो कभी अपने जिले का।

बस, यहीं से शुरू होती है घर लौटने की एक नई यात्रा।

आश्रम की टीम स्थानीय पुलिस, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, क्राइम ब्रांच, जिला प्रशासन, ग्राम पंचायतों और विभिन्न राज्यों के प्रशासन के साथ मिलकर उन परिवारों तक पहुँचने का प्रयास करती है। सैकड़ों फोन कॉल, वीडियो कॉल, सोशल मीडिया और पुलिस रिकॉर्ड की मदद से आखिरकार वह दिन आता है, जब वर्षों से बिछड़ा परिवार फिर से एक-दूसरे के सामने खड़ा होता है।

75 वर्षीय रामरती, 65 वर्षीय फूली देवी, 45 वर्षीय माया देवी, निक्की, कौशल्या, सुनीता जैसी अनेक महिलाओं की घर वापसी केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि वर्षों से सूनी पड़ी ज़िंदगियों में फिर से खुशियाँ लौटने का पल था। कई परिवार अपनी बेटियों और माताओं को देखकर फूट-फूटकर रो पड़े। कई बच्चों ने वर्षों बाद अपनी माँ को गले लगाया। कई पतियों को विश्वास ही नहीं हुआ कि जिनकी तलाश उन्होंने लगभग छोड़ दी थी, वे आज उनके सामने खड़ी हैं।

आश्रम की यह सेवा हरियाणा तक सीमित नहीं है। यहाँ से महिलाएँ राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न राज्यों में अपने परिवारों तक पहुँची हैं। इतना ही नहीं, आश्रम ने नेपाल की एक महिला को भी उसके परिवार से सुरक्षित मिलवाकर मानवता की मिसाल पेश की।

हर कहानी का अंत घर वापसी से नहीं होता।

कुछ महिलाएँ ऐसी भी होती हैं, जिन्हें कभी अपनी पहचान याद नहीं आती। कुछ का कोई परिवार ही नहीं बचा होता। ऐसे में भाग्यश्री महिला अनाथ आश्रम ही उनका परिवार बन जाता है। आश्रम उन्हें जीवनभर सम्मान, सुरक्षा और अपनापन देता है। इतना ही नहीं, जिन 8 महिलाओं की पहचान कभी नहीं हो सकी, उनके अंतिम संस्कार का दायित्व भी आश्रम ने पूरे सम्मान और मानवीय संवेदनाओं के साथ निभाया।

आश्रम की इस मानवीय यात्रा को M3M Foundation का सतत सहयोग मिल रहा है। फाउंडेशन के सहयोग से महिलाओं के लिए भोजन, चिकित्सा, वस्त्र, स्वच्छता सामग्री, पुनर्वास और परिवारों को खोजने जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं।

बाला वर्मा, संस्थापक, भाग्यश्री सेवा संस्थान ट्रस्ट, ने कहा, “हमारे लिए आश्रम में आने वाली हर महिला किसी की माँ, बेटी, बहन या पत्नी है। हमारा उद्देश्य केवल उन्हें आश्रय देना नहीं, बल्कि उनकी पहचान वापस दिलाना और उन्हें उनके परिवार तक पहुँचाना है। जब वर्षों बाद कोई बेटा अपनी माँ को गले लगाता है या कोई परिवार अपनी बेटी को सुरक्षित देखकर रो पड़ता है, वही पल हमें इस सेवा को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।”

डॉ. पायल कनोडिया, चेयरपर्सन एवं ट्रस्टी, M3M Foundation, ने कहा, “M3M Foundation का विश्वास है कि समाज के सबसे कमजोर और उपेक्षित वर्ग तक सम्मान और संवेदनशीलता के साथ पहुँचना ही सच्ची सामाजिक जिम्मेदारी है। भाग्यश्री महिला अनाथ आश्रम के साथ हमारी साझेदारी केवल एक संस्था का सहयोग नहीं, बल्कि उन महिलाओं की गरिमा, पहचान और परिवारों को लौटाने का प्रयास है, जिनकी उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी। हर पुनर्मिलन हमें यह विश्वास दिलाता है कि संवेदनशीलता और सामूहिक प्रयास से असंभव लगने वाले सपने भी पूरे किए जा सकते हैं।”

क्योंकि कभीकभी किसी महिला को बचाना ही सबसे बड़ा काम नहीं होतासबसे बड़ा काम होता है उसे उसके अपनों तक वापस पहुँचाना। और जब वह घर लौटती है, तो सिर्फ एक महिला नहीं लौटती, एक माँ लौटती है, एक बेटी लौटती है, एक पत्नी लौटती है, और सबसे बढ़कर, एक परिवार फिर से पूरा हो जाता है।

Also Read in English: An Ashram That Shows Lost Lives the Way Back Home

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