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नई दिल्ली। वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने दृढ़ता और व्यक्तिगत विकास पर अपने विचार साझा किए हैं। इसके लिए उन्होंने किंत्सुगी से प्रेरणा ली, जो जापान की एक पारंपरिक कला है, जिसमें टूटी हुई मिट्टी की वस्तुओं को सोने से जोड़कर फिर से सुंदर बनाया जाता है। हाल ही में X पर साझा की गई अपनी पोस्ट में अनिल अग्रवाल ने कहा कि जीवन में आने वाली चुनौतियाँ और असफलताएँ ही अक्सर ऐसे अनुभव बन जाती हैं, जो व्यक्ति के व्यक्तित्व को आकार देती हैं और उसकी सफलता की नींव रखती हैं।
किंत्सुगी के पीछे की सोच पर अपने विचार साझा करते हुए, अनिल अग्रवाल ने कहा कि यह कला टूटी हुई दरारों को छिपाने की कोशिश नहीं करती, बल्कि उन्हें उस वस्तु की अनोखी कहानी का हिस्सा मानकर सम्मान देती है। उन्होंने इसकी तुलना अपनी उद्यमिता की यात्रा से करते हुए कहा कि उन्होंने कई सफल व्यवसाय खड़े किए हैं, लेकिन इसके साथ-साथ कई असफलताओं का भी सामना किया है। उनके अनुसार, ये असफलताएँ भी उतनी ही महत्वपूर्ण रहीं, क्योंकि इन्होंने उनकी सोच, दृष्टिकोण और नेतृत्व क्षमता को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई।
उद्यमिता के अपने दशकों लंबे अनुभव से सीख साझा करते हुए अनिल अग्रवाल ने कहा कि चुनौतियों और असफलताओं को स्थायी हार नहीं, बल्कि सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें एहसास होता है कि जो व्यवसाय सफल नहीं हो सके, उन्होंने भी उनके व्यक्तिगत और पेशेवर विकास में उतना ही महत्वपूर्ण योगदान दिया, जितना सफल व्यवसायों ने। उनके अनुसार, यह अनुभव दृढ़ता, लगातार प्रयास करते रहने की भावना और जीवन के हर पड़ाव को स्वीकार करने के महत्व को और मजबूत करता है।
यह विचार केवल व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्यमियों, पेशेवरों और अनिश्चित परिस्थितियों का सामना कर रहे युवा नेताओं के लिए भी एक व्यापक संदेश देता है। अनिल अग्रवाल का मानना है कि असफलता से डरने के बजाय लोगों को यह समझना चाहिए कि चुनौतियाँ और निराशाएँ ही अक्सर भविष्य की सफलता की मजबूत नींव बनती हैं। यही अनुभव व्यक्ति को और अधिक मजबूत, समझदार और लंबे समय तक सकारात्मक प्रभाव छोड़ने में सक्षम बनाते हैं।
अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा:
Kintsugi, अपनी खामियों और failures को भी अपनाने की खूबसूरत philosophy!
आप जानते हैं Kintsugi, एक सुंदर Japanese philosophy और रीत है, जिसके अनुसार अगर मिट्टी का कोई बर्तन टूट जाए, तो उसे फेंका नहीं जाता। उसकी दरारों को सोने से जोड़ा जाता है।
सबसे खूबसूरत बात यह है कि उन दरारों को छिपाया नहीं जाता, उन्हें और उभारा जाता है।
हाल ही में Japan की यात्रा के दौरान Kintsugi के बारे में जब जाना, तो लगा कि यह सिर्फ़ बर्तनों की नहीं, ज़िंदगी की भी तो कहानी है।
मेरे जीवन में जहाँ कई businesses सफल हुए, वहाँ कई ऐसे भी रहे, जो सफल नहीं हो पाए। उस समय लगा कि शायद कुछ छूट गया, कुछ टूट गया।
मगर आज पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो लगता है, अगर वो failures न होते, तो शायद मैं भी आज जो बन पाया, शायद कभी ना बन पाता।
हमारी दरारें हमारी कमज़ोरी नहीं हैं। हमारा कोई failure आख़िरी नहीं है। यही हमें और मज़बूत, और पहले से ज़्यादा खूबसूरत बनाते हैं।
ट्विटर पोस्ट: https://x.com/AnilAgarwal_Ved/status/2072553235299344607
Kintsugi, अपनी खामियों और failures को भी अपनाने की खूबसूरत philosophy!
आप जानते हैं Kintsugi, एक सुंदर Japanese philosophy और रीत है, जिसके अनुसार अगर मिट्टी का कोई बर्तन टूट जाए, तो उसे फेंका नहीं जाता। उसकी दरारों को सोने से जोड़ा जाता है। सबसे खूबसूरत बात यह है कि उन दरारों… pic.twitter.com/P7NfQfjD5L
लिंकडइन पोस्ट: https://www.linkedin.com/posts/anilagarwal-ved_recently-on-my-trip-i-learned-about-kintsugi-share-7478318658927243264-Xlkm/
अनिल अग्रवाल के बारे में:
श्री अनिल अग्रवाल वेदांता लिमिटेड के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष और वेदांता समूह के संस्थापक हैं। चार दशकों से अधिक के उद्यमिता अनुभव के साथ, उन्होंने वेदांता समूह की परिकल्पना की और उसका नेतृत्व करते हुए एक साधारण घरेलू खनन कंपनी को महत्वपूर्ण खनिजों, ट्रांजिशन मेटल्स, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत एक वैश्विक और विविधीकृत समूह के रूप में विकसित किया।
मार्च 2005 से वे यूनाइटेड किंगडम स्थित समूह की होल्डिंग कंपनी वेदांता रिसोर्स के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं और कंपनी के रणनीतिक विकास तथा वैश्विक विस्तार का नेतृत्व कर रहे हैं।
वे मानते हैं कि व्यवसायों की जिम्मेदारी समाज को वापस देना भी है। इसी सोच के तहत उन्होंने द गिविंग प्लेज के माध्यम से अपनी 75% संपत्ति समाज के कल्याण के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया है।
उनकी संस्था अनिल अग्रवाल फाउंडेशन समुदायों को सशक्त बनाने और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य करती है। फाउंडेशन की प्रमुख पहल नंद घर के तहत पूरे भारत में 15,000 से अधिक केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों को पौष्टिक आहार, प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, साथ ही महिलाओं को विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए सशक्त बनाया जाता है।




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